मान्सून से पहले लंबित विद्युत कार्य पूरे करें, स्मार्ट मीटर की जबरदस्ती बंद करें - वरना आंदोलन!

* कर्जत तहसील बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति ने महावितरण को दिया दो महीने का अल्टीमेटम

कर्जत / नरेश जाधव :- कर्जत तहसील के गांव - गांव में वर्षों पुरानी और जर्जर विद्युत तारों, पोलों व अन्य उपकरणों के कारण बार-बार बिजली आपूर्ति बाधित होने के साथ दुर्घटनाओं में वृद्धि हो रही है। इसको लेकर कर्जत तहसील बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति ने महावितरण प्रशासन को दो महीने का अल्टीमेटम दिया है। समिति ने मांग की है कि मान्सून से पहले सभी लंबित विद्युत कार्य पूरे किए जाएं तथा स्मार्ट मीटर लगाने की जबरदस्ती तुरंत बंद की जाए। अन्यथा महावितरण के खिलाफ तीव्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।


संघर्ष समिति की ओर से आज महावितरण के उप अभियंता केंद्रे को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में बताया गया है कि कर्जत तहसील के कई गांवों में पिछले 30 वर्षों से अधिक समय से पुरानी व जर्जर हालत की विद्युत लाइनें और पोल उपयोग में है। इस वजह से बार-बार बिजली गुल होती है, वहीं बरसात के मौसम में करंट लगने से नागरिकों और पशुओं की मौत की घटनाएं भी सामने आई है। अगस्त 2024 में बिजली उपभोक्ताओं ने आठ दिनों तक श्रृंखलाबद्ध उपोषण कर जर्जर तारों, पोलों और उपकरणों को बदलने की मांग की थी। इसके बाद भी समय - समय पर ज्ञापन दिए गए, लेकिन महावितरण ने इन समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया, ऐसा आरोप समिति ने किया है।


* दुर्घटनाओं के लिए प्रशासन की लापरवाही जिम्मेदार :- इस वर्ष मान्सून के दौरान कई स्थानों पर करंट लगने से नागरिकों की मौत हुई है, साथ ही पशुओं को भी जान गंवानी पडी है। समिति का कहना है कि समय रहते आवश्यक कार्य न किए जाने से बनी खतरनाक स्थिति इन हादसों के लिए जिम्मेदार है। नागरिकों की सुरक्षा से समझौता किए बिना तत्काल जर्जर विद्युत व्यवस्था बदली जाए, ऐसी मांग ज्ञापन में की गई है।


* स्मार्ट मीटर की जबरन स्थापना पर आपत्ति :- समिति ने आरोप लगाया है कि पहले महावितरण की ओर से लिखित व सार्वजनिक रूप से यह आश्वासन दिया गया था कि स्मार्ट मीटर जबरन नहीं लगाए जाएंगे। लेकिन पिछले दो महीनों से “मीटर खराब है”, “वरिष्ठों का दबाव है”, “पुलिस बुला देंगे” जैसे कारण बताकर उपभोक्ताओं पर दबाव डालते हुए स्मार्ट मीटर लगाने की जबरदस्ती की जा रही है। यह तरीका गलत और अन्यायपूर्ण है, ऐसा समिति का कहना है।


* दो महीने में मांगें पूरी नहीं हुईं तो उग्र आंदोलन :- ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि यदि दो महीने के भीतर जर्जर तारों, पोलों व अन्य विद्युत उपकरणों को बदलने का कार्य पूरा नहीं किया गया और स्मार्ट मीटर की जबरदस्ती जारी रही, तो महावितरण के खिलाफ तीव्र स्वरूप का आंदोलन किया जाएगा। आंदोलन के कारण उत्पन्न होने वाली स्थिति व कानून - व्यवस्था से जुड़े परिणामों की जिम्मेदारी पूरी तरह महावितरण प्रशासन की होगी, ऐसा कडा इशारा भी समिति ने दिया है।


इस ज्ञापन की प्रतिलिपि जानकारी के लिए मुख्य अभियंता (महावितरण) भांडुप, अधीक्षक अभियंता पेण रायगढ तथा कार्यकारी अभियंता पनवेल रायगढ को भेजी गई है। ज्ञापन सौंपते समय कर्जत तहसील बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति के पदाधिकारी तथा बडी संख्या में बिजली उपभोक्ता उपस्थित थे।

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