* प्रो. वसंत हंकारे के हृदयस्पर्शी संवाद से माता - पिता का महत्व समझा ; हजारों विद्यार्थी - अभिभावक भावुक
नगरदेवला / फिरोज पिंजारी :- मोबाईल और सोशल मीडिया की आंधी में आज की युवा पीढी माता - पिता से दूर होती जा रही है, यह चिंता अक्सर जताई जाती है। लेकिन गुरुवार, 5 फरवरी 2026 को पाचोरा पुलिस स्टेशन और नगरदेवला पुलिस चौकी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘मेरी बेटी, मेरा गर्व’ कार्यक्रम ने नगरदेवला नगरी को भावनाओं से भर दिया। युवा वक्ता, समाज परिवर्तनकर्ता और महाराष्ट्र के “फायर ब्रांड” के रूप में पहचाने जाने वाले प्रो. वसंत हंकारे ने अपने दो घंटे के प्रभावशाली और प्रवाहपूर्ण संवाद से उपस्थितों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कभी हास्य से हँसाया तो कभी भावनात्मक शब्दों से रुला दिया। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों के साथ-साथ अभिभावकों की आँखें भी भर आईं।
सरदार एस. के. पवार माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालय के विशाल मैदान में सुबह 10 बजे यह कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यक्रम में पाचोरा तहसीलदार विजय बनसोडे, पुलिस निरीक्षक राहुलकुमार पवार, पुलिस उपनिरीक्षक योगेश गणगे, सहायक फौजदार निवृत्ती मोरे, नगरदेवला ग्राम पंचायत की प्रधान प्रतिक्षा किरण काटकर, ग्राम विकास समिति के सदस्य अ. गनी कमरुद्दीन, शिवसेना जिला प्रमुख रावसाहेब मनोहर गिरधर पाटील, भाजपा नेता प्रणय दिलीप भांडारकर, पाचोरा नगर परिषद के पूर्व पार्षद शीतल सोमवंशी सहित विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य, शिक्षक, अभिभावक तथा बडी संख्या में छात्र - छात्राएँ उपस्थित थे।
एक ही व्याख्यान ने पूरे मैदान को भावनाओं से भिगो दिया। माता - पिता के त्याग, संघर्ष और प्रेम का एहसास कराते हुए प्रो. हंकारे के शब्दों ने हजारों दिलों को छू लिया। यह केवल एक भाषण नहीं, बल्कि माता - पिता और संतान के रिश्ते को फिर से जीवंत करने वाला भावनात्मक जागरण था।
* सोशल मीडिया के ‘झूठे प्रेम’ से सावधान रहने की अपील :- प्रो. हंकारे ने आज की युवा पीढ़ी की वास्तविकता से अपनी बात शुरू की। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में झूठे प्रेम के जाल में फँसकर कई युवक - युवतियाँ अपना भविष्य बर्बाद कर लेते है। क्षणिक आकर्षण के पीछे भागकर जीवन की दिशा भटक जाती है। उन्होंने बेटियों से अपील की कि वे झूठे प्रेम के जाल में न फँसें और लड़कों से कहा कि वे नशे की लत में पड़कर अपना और अपने माता - पिता का जीवन बर्बाद न करें।
* माँ की पीडा, पिता के संघर्ष और आँखों में आँसू :- माँ की प्रसव पीडा और पिता के जीवनभर के संघर्षों का जीवंत वर्णन करते हुए प्रो. हंकारे ने कहा, माँ प्रसव वेदना सहते हुए भी डॉंक्टर से कहती है कि मेरा जीवन जाएं तो भी चले, लेकिन मेरे गर्भ का बच्चा बच जाएं। पिता धूप, हवा, बारिश में मेहनत करता है, खुद फटे कपडे पहनकर बच्चों को अच्छे कपडे दिलाता है। उस पसीने की हर बूँद की कीमत समझो। यह सुनकर कई विद्यार्थियों की आँखें भर आईं।
* पिता को गले लगाने का आवाहन और भावनाओं का सैलाब :- कार्यक्रम के अंत में प्रो. हंकारे ने विद्यार्थियों से अपने उपस्थित पिता को गले लगाने का आवाहन किया। कुछ ही क्षणों में मैदान भावनाओं से उमड़ पडा। बच्चे अपने पिता के कंधों पर सिर रखकर रोने लगे। इस दृश्य को देखकर शिक्षक, अभिभावक और नागरिक भी भावुक हो गए। यह पल कई लोगों के जीवन का अविस्मरणीय क्षण बन गया।
* माता - पिता जीवित है तो उनके हर श्वास पर प्रेम करो :- प्रो. हंकारे ने भावुक शब्दों में कहा, माता - पिता के चले जाने के बाद कोई भी देवता उन्हें वापस नहीं ला सकता। इसलिए जब तक उनके सीने में साँस है, उनके हर श्वास पर प्रेम करो। जिन घरों में माता - पिता खुश रहते है, वही घर वास्तव में समृद्ध होते है। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज और संभाजी महाराज के आदर्शों का उल्लेख करते हुए पारिवारिक मूल्यों, संस्कार और स्वाभिमान का महत्व बताया।
* युवाओं को जीवन मूल्यों का मंत्र :- सोशल मीडिया पर बनी पहचान के प्रभाव में आकर कई युवा कम उम्र में गलतियाँ कर बैठते है, जिसका खामियाजा पूरे परिवार को भुगतना पडता है। इसलिए प्रो. हंकारे ने युवाओं से अपील की कि वे क्षणिक प्रलोभनों से दूर रहकर बुद्धिमानी से निर्णय लें, शिक्षा पर ध्यान दें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें। उन्होंने कहा, कभी अनाथालय जाकर देखो, माता - पिता के बिना जीवन कितना कठिन होता है, और इस तरह उपस्थित लोगों के अंतर्मन को झकझोर दिया।
पाचोरा पुलिस स्टेशन और नगरदेवला पुलिस चौकी की पहल से आयोजित ‘मेरी बेटी, मेरा गर्व’ कार्यक्रम की सभी स्तरों पर सराहना हो रही है। महिला सशक्तिकरण, सामाजिक जागरूकता और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने वाला यह कार्यक्रम युवाओं के लिए दिशादर्शक साबित हुआ। नागरिकों ने अपेक्षा जताई कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित किए।
