* 67 वर्षीय नागरिक का अर्धनग्न होकर आक्रोश ; पाँच साल से लंबित नाली कार्य के लिए प्रशासन पर गंभीर आरोप
खोपोली / मानसी कांबले - खलील सुर्वे :- न्याय पाने के लिए एक 67 वर्षीय बुजुर्ग को ऐसा कदम उठाना पडा, जिसने पूरे शहर को झकझोर दिया। खोपोली नगर परिषद की कथित लापरवाही और संवेदनहीनता से त्रस्त होकर एक वयोवृद्ध नागरिक ने अर्धनग्न होकर विरोध दर्ज कराया। यह घटना केवल एक व्यक्ति की पीडा नहीं, बल्कि शहर में व्याप्त प्रशासनिक उदासीनता का आईना बन गई है।
खोपोली निवासी कस्तुरचंद चुनाजी राठोड (67) पिछले पाँच वर्षों से अपने घर के सामने नाली (गटर) निर्माण के अधूरे कार्य को लेकर नगर परिषद के चक्कर काट रहे है। उनका आरोप है कि उन्होंने 100 से अधिक बार नगर परिषद कार्यालय का रुख किया, लेकिन नगर अभियंता अनिल वाणी सहित संबंधित विभागों ने उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
बरसात के मौसम में पानी भराव, दुर्गंध और स्वास्थ्य जोखिम झेलते-झेलते उनकी सहनशक्ति टूट गई। सोमवार, 2 फरवरी 2026 को वे नगर परिषद कार्यालय पहुँचे और इंजीनियर अनिल वाणी के सामने अर्धनग्न होकर आंदोलन किया। हाथ में तख्ती लेकर भावुक स्वर में उन्होंने कहा की, “अगर अधिकारियों का पेट नहीं भरता तो हमारे कपडे ले लो, लेकिन हमारा काम तो करो!” इस दृश्य ने वहाँ मौजूद लोगों की आँखें नम कर दीं। शहरवासियों का कहना है कि यह गांधीजी के सत्याग्रह की तरह अन्याय के खिलाफ एक अहिंसक लेकिन तीखा विरोध है। नागरिकों में इस बात को लेकर गुस्सा है कि प्रशासन की जिद और बेरुखी ने एक बुज़ुर्ग को इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
घटना के बाद भी नगर परिषद की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। नाली का काम कब शुरू होगा, यह अब भी सवाल बना हुआ है। नागरिकों ने मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई हो, राठोड के घर के सामने नाली निर्माण तुरंत शुरू किया जाएं और नगर परिषद के कामकाज की जांच कराई जाए।
खोपोली नगर परिषद मुख्याधिकारी डॉं. पंकज पाटील, नगराध्यक्ष कुलदीपक शेंडे, उपनगराध्यक्ष विक्रम साबले, निर्माण समिति सभापति अनिल सानप तथा सभी दलों के जनप्रतिनिधि क्या कस्तुरचंद चुनाजी राठोड को न्याय दिलाएँगे ? या फिर उन्हें आमरण अनशन और बडे आंदोलन का रास्ता अपनाना पडेगा ? खोपोली में लोगों की एक ही मांग है की, अब सिर्फ आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए। एक बुजुर्ग के आँसू और आक्रोश ने शहर को जगा दिया है, अन्याय की सीमा पार हो जाए तो ‘गांधीगिरी’ भी तीखी हो जाती है, यह इस घटना ने साबित कर दिया है।
