* तेल्हारा के बौद्ध समाज की कड़ी प्रतिक्रिया
* गणतंत्र दिवस पर डॉं. बाबासाहेब आंबेडकर का नाम जानबूझकर न लेने का आरोप ; मंत्रिमंडल से बर्खास्तगी की भी मांग
अकोला / संवाददाता :- 26 जनवरी 1950 को भारतरत्न डॉं. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा रचित भारतीय संविधान देश में लागू हुआ और भारत एक गणतंत्र राष्ट्र घोषित हुआ। तभी से हर वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पूरे देश में बडे सम्मान और गौरव के साथ मनाया जाता है तथा इस अवसर पर संविधान निर्माता डॉं. बाबासाहेब आंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है।
हालांकि, 26 जनवरी 2026 को नासिक में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में पालकमंत्री गिरीश महाजन ने अपने भाषण में डॉं. बाबासाहेब आंबेडकर का नाम जानबूझकर नहीं लिया, ऐसा गंभीर आरोप तेल्हारा के बौद्ध समाज ने किया है।
तेल्हारा के बौद्ध समाज की ओर से प्रशासन को सौंपे गए औपचारिक ज्ञापन में कहा गया है कि, भारतीय संविधान का गौरव करने वाले गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम में डॉं. बाबासाहेब आंबेडकर का नाम न लेना केवल भूल नहीं, बल्कि जातीय द्वेष से किया गया कृत्य है। बौद्ध समाज का कहना है कि इस घटना से समाज की भावनाएं आहत हुई है और यह संविधान तथा उसके निर्माता का अपमान है।
इस प्रकरण में पालकमंत्री गिरीश महाजन के खिलाफ अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (एट्रोसिटी एक्ट) के तहत मामला दर्ज किया जाएं, ऐसी ठोस मांग बौद्ध समाज की ओर से की गई है। साथ ही, ऐसे जातिवादी मंत्री को तत्काल मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की भी मांग ज्ञापन में दर्ज की गई है।
इस मांग को लेकर संबंधित अधिकारियों को औपचारिक ज्ञापन सौंपा गया है, जिस पर विनोद पोहरकर, विकास पवार, सचिन पोहरकर, संघर्ष बोदडे, गव्हांदे, प्रवीण पोहरकर सहित अनेक नागरिकों के हस्ताक्षर है।
घटना के बाद तेल्हारा क्षेत्र में तीव्र आक्रोश देखा जा रहा है। बौद्ध समाज ने स्पष्ट रूप से कहा है कि, संविधान और डॉं. बाबासाहेब आंबेडकर का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और शासन इस मांग पर क्या रुख अपनाते है तथा संबंधित मंत्री के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई होती है या नहीं, इस पर पूरे क्षेत्र की नजरें टिकी हुई है।
