उत्तर सामान्य वन परिक्षेत्र लामता में “अनुभूति कार्यक्रम” का भव्य आयोजन

* 'मैं हूँ बाघ’ और ‘हम हैं धरती के दूत’ थीम पर स्कूली बच्चों को कराया गया जंगल भ्रमण, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

लामता / शैलेंद्र सिंह सोमवंशी :- म. प्र. इको विकास पर्यटक एवं उत्तर सामान्य वन परिक्षेत्र लामता के महकापाठा बीट में वन विभाग द्वारा “अनुभूति कार्यक्रम” का भव्य आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का आयोजन “मैं हूँ बाघ” और “हम है धरती के दूत” थीम पर किया गया, इस कार्यक्रम में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लामता, माध्यमिक विद्यालय बुढ़ियागांव, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चांगोटोला, माध्यमिक विद्यालय बसेगाँव के कुल 112 बच्चों को शामिल किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य स्कूली बच्चों को जंगल, वन्य जीव और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्कूली छात्र‑छात्राओं, शिक्षकों एवं वन विभाग के अधिकारियों की सहभागिता रही।


कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों को जंगल भ्रमण कराया गया, जहाँ उन्हें वन्य जीव, वनस्पति, जैव विविधता एवं प्रकृति संरक्षण से संबंधित जानकारी दी गई। बच्चों को बताया गया कि वे धरती के दूत हैं और उन्हें पर्यावरण की रक्षा करने की जिम्मेदारी निभानी है।


* जंगल भ्रमण के दौरान बच्चों को मिली प्रकृति की प्रत्यक्ष अनुभूति :- अनुभूति कार्यक्रम के तहत छात्र‑छात्राओं को वन क्षेत्र में ले जाकर जंगलों की उपयोगिता, पेड‑पौधों, औषधीय वनस्पतियों और जीव‑जंतुओं के पगमार्ग के बारे में जानकारी दी गई। वन अधिकारियों ने बच्चों को समझाया कि जंगल ही ऑक्सीजन, जल संरक्षण, वर्षा और पर्यावरण संतुलन का आधार हैं।


* 'मैं हूँ बाघ’ थीम पर बाघ संरक्षण की दी गई जानकारी :- कार्यक्रम में बच्चों को बाघ संरक्षण के महत्व पर विशेष रूप से जागरूक किया गया। अधिकारियों ने बताया कि बाघ जंगल का शीर्ष शिकारी होता है और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बच्चों को संदेश दिया गया कि “अगर बाघ सुरक्षित रहेगा, तो जंगल सुरक्षित रहेंगे और जंगल सुरक्षित रहेंगे तो धरती सुरक्षित रहेगी।”


* “हम हैं धरती के दूत” संदेश के साथ पर्यावरण संरक्षण की शपथ :- कार्यक्रम के दौरान बच्चों को “हम है धरती के दूत” थीम के तहत पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त जीवन और वन्य जीव सुरक्षा का संदेश दिया गया। बच्चों ने पृथ्वी, जंगल और वन्य जीवों की रक्षा करने की शपथ ली और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।


* बच्चों में दिखा उत्साह और जागरूकता :- जंगल भ्रमण के दौरान बच्चों में विशेष उत्साह और जिज्ञासा देखने को मिली। छात्र‑छात्राओं ने वन अधिकारियों से सवाल‑जवाब कर प्रकृति और पर्यावरण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कीं। बच्चों ने कहा कि वे भविष्य में पेड लगाएंगे और प्रकृति को बचाने का कार्य करेंगे।


* वन विभाग की सराहनीय पहल :- वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अनुभूति कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को प्रकृति से जोड़ना और उन्हें धरती का दूत बनाकर पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी सौंपना है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर समाज में पर्यावरण के प्रति चेतना फैलायी जाएगी। इसके बाद मास्टर ट्रेनर एवं वन अधिकारियो द्वारा वन्य प्राणियों के पोस्टर, चित्रकला एवं प्रश्न उत्तरी परीक्षा ली गई, बच्चों को प्रोत्साहन हेतु प्रशस्ति पत्र वितरण किया गया।


* अनुभूति कार्यक्रम समाज के लिए प्रेरणादायक :- यह कार्यक्रम न केवल बच्चों के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक रहा। “हम हैं धरती के दूत” जैसे संदेश से आने वाली पीढ़ी में प्रकृति, जंगल और वन्य जीवों के प्रति प्रेम और संरक्षण की भावना विकसित होगी, जिससे पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।


अनुभूति कार्यक्रम में वन विभाग द्वारा क्षेत्रीय जन प्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों को आमंत्रित किया गया था। जिसमें जिला लघुवनौपज के अध्यक्ष अशोक मण्डलेकर, जिला पंचायत सदस्य स्मिता तेकाम, जनपद सदस्य (वन सभापति) ज्ञानसिंह सैय्याम, जनपद सदस्य (निर्माण समिति सभापति) भुनेश्वर रजक,शत्रुघ्न असाटी अध्यक्ष (वन सुरक्षा समितिलामता) थाना निरीक्षक नितिन पटले, पुलिस उपनिरीक्षक लामता, मास्टर ट्रेनर चाल्स, शर्मा जी, वन परिक्षेत्र अधिकारी  देवेंद्र रंगारे, सहायक परिक्षेत्र अधिकारी नीतू गिरी, सहायक परिक्षेत्र अधिकारी विजय श्रीवास्तव नगरवाडा, सहायक परिक्षेत्र अधिकारी तिवारी कुमनगांव, शिक्षक शिक्षिकाय समस्त वन रक्षक एवं अग्निसुरक्षा कर्मी की उपस्तिथि में सफल कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

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