* महात्मा फुले जयंती पर ‘क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले अध्ययन कक्ष’ का शुभारंभ ; 70-80 छात्राओं को मिला नया अवसर
नगरदेवला / फिरोज पिंजारी :- नगरदेवला गांव की प्रतियोगी परीक्षाओं और पुलिस भर्ती की तैयारी कर रही छात्राओं के लिए बडी राहत की खबर सामने आई है। शिवकन्या बहुउद्देशीय संस्था के माध्यम से महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री स्व. अजितदादा पवार की स्मृति में ‘क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले लड़कियों का अध्ययन कक्ष’ शुरू किया गया है। इससे अब छात्राओं को अध्ययन के लिए स्वतंत्र और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
इस अध्ययन कक्ष का उद्घाटन महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती के अवसर पर तहसीलदार विजय बनसोडे और नगरदेवला की सरपंच प्रतिक्षा किरण काटकर के हस्ते महात्मा फुले एवं सावित्रीबाई फुले की प्रतिमा पूजन कर किया गया।
नगरदेवला की छात्राओं की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए शिवकन्या बहुउद्देशीय संस्था की संस्थापक अध्यक्षा अभिलाषा रोकड़े ने अपने स्वयं के प्रयास, खर्च और दृढ़ संकल्प के साथ इस अध्ययन कक्ष की शुरुआत की। 'दै. कोकण प्रदेश न्यूज’ में प्रकाशित खबर के माध्यम से छात्राओं की कठिनाइयों की जानकारी सामने आई थी, जिसके बाद तुरंत पहल करते हुए इस प्रकल्प को साकार किया गया। इस कार्य में दिगर विकासो सोसायटी और पूर्व विधायक दिलीप भाऊ वाघ युवा फाउंडेशन का भी सहयोग मिला।
इस अध्ययन कक्ष के शुरू होने से नगरदेवला की करीब 70 से 80 छात्राओं को अब पढ़ाई के लिए एक शांत और व्यवस्थित स्थान उपलब्ध हुआ है। पुलिस भर्ती और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही छात्राओं ने इस पहल के लिए आयोजकों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर तहसीलदार विजय बनसोडे ने छात्राओं को मार्गदर्शन देते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षा खुद के साथ की जाने वाली प्रतिस्पर्धा है। सफलता के लिए निरंतर मेहनत, आत्मविश्वास और सही दिशा जरूरी है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने भी प्रतिदिन 17-18 घंटे अध्ययन किया है। साथ ही उन्होंने आगे भी छात्राओं को मार्गदर्शन देने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम में सरदार एस. के. पवार विद्यालय के प्राचार्य किरण काटकर और प्रा. उमेश काटकर ने भी छात्राओं का मार्गदर्शन किया। सरपंच प्रतिक्षा काटकर और प्राचार्य किरण काटकर ने अध्ययन कक्ष के लिए आवश्यक पुस्तकों की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया।
इस अवसर पर शिवकन्या बहुउद्देशीय संस्था अध्यक्षा अभिलाषा रोकड़े, डॉं. वैशाली अभय पाटील, राजेंद्र महाजन, इंद्रनील भामरे, गणेश देशमुख,मुरलीधर महाजन, प्रकाश जगताप, संजय सोनार, जितेंद्र परदेशी, रावसाहेब राऊल, विश्वनाथ निकुंभ, हसीबूर शेख, सुनील भामरे, रोहन दुसाने, स्वप्नील धिवरे, दगडू राजपूत, अभिजीत रोकडे, मयुरी राजपूत, वैष्णवी बिरारी, दिपाली पाटील, दिव्या महाजन, राणी पाटील, कामिनी पाटील, प्रतिक्षा महाजन, सोनाली पवार, हर्षदा बिरारी, सानिया शेख, पूनम पवार, शुभांगी कोली, सेजल पाटील, वैष्णवी शिंदे, उज्वला पाटील, मयुरी निकुंभ, शितल पाटील, हेमांगी पाटील, चेतना शिंपी, छाया गोसावी सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार और ग्रामस्थ बडी संख्या में मौजूद रहे।
संघर्ष को मिली दिशा :- नगरदेवला की छात्राएं लंबे समय से सीमित संसाधनों के बावजूद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थीं। अध्ययन के लिए उचित स्थान और सुविधाओं के अभाव के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को जीवित रखा था। 17 फरवरी 2026 को प्रकाशित खबर “सावित्री की बेटियों का संघर्ष” के बाद समाज में जागरूकता बढी और इस अध्ययन कक्ष के रूप में ठोस कदम उठाया गया।
