* खालापुर तालुका शिक्षण प्रसारक मंडल के संयुक्त क्रीड़ा महोत्सव के उद्घाटन पर पुलिस निरीक्षक सचिन हिरे का स्पष्ट संदेश
खोपोली / फिरोज पिंजारी :- चार दीवारों में सिमटा बचपन और मोबाइल स्क्रीन पर चलने वाली आभासी दुनिया आज की पीढ़ी के लिए खतरे की घंटी बन चुकी है। मोबाइल गेम्स की लत के कारण बच्चे अकेलापन, चिड़चिड़ापन और मानसिक तनाव का शिकार हो रहे है। यदि इस दुष्चक्र को रोकना है, तो मैदान ही बच्चों की असली लाइफलाइन बननी चाहिए, यह सशक्त और यथार्थवादी संदेश खोपोली पुलिस थाने के पुलिस निरीक्षक सचिन हिरे ने दिया।
वे खालापुर तालुका शिक्षण प्रसारक मंडल के संयुक्त वार्षिक क्रीड़ा महोत्सव के भव्य उद्घाटन अवसर पर संबोधित कर रहे थे।
क्रीड़ा महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर अतिथियों का उत्साहपूर्ण स्वागत, विद्यार्थियों की अनुशासित मार्च-पास्ट, खिलाड़ियों की रोमांचक प्रस्तुतियाँ, ध्वजारोहण, क्रीड़ा मशाल प्रज्वलन तथा मैदान पूजन जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से समारोह की जोशीली और भव्य शुरुआत हुई।
जनता विद्यालय एवं कनिष्ठ महाविद्यालय, जनता विद्यालय प्राथमिक व पूर्व-प्राथमिक शाला, बी. एल. पाटील तंत्रनिकेतन, के. एम. सी. कॉलेज, शिशुमंदिर और गगनगिरी इंटरनेशनल स्कूल इन सभी शाखाओं के संयुक्त क्रीड़ा महोत्सव का उद्घाटन उपविभागीय पुलिस अधिकारी डॉं. विशाल नेहुल के कर-कमलों से बड़े उत्साह के साथ संपन्न हुआ। मैदान में विद्यार्थियों के साथ-साथ अभिभावकों और खेल प्रेमियों की भारी उपस्थिति देखने को मिली।
इस अवसर पर मंच पर उपविभागीय पुलिस अधिकारी डॉं. विशाल नेहुल, पुलिस निरीक्षक सचिन हिरे, खालापुर तालुका शिक्षण प्रसारक मंडल के अध्यक्ष संतोष जंगम, निदेशक दिनेश गुरव, दिलीप पोरवाल, भास्कर लांडगे, विजय चुरी, प्राचार्य के. एम. गोरे, प्रशांत माने, वर्षा घारे, डॉं. गौरव तिवारी, प्रधानाचार्या जान्सी ऑगस्टीन, समिक्षा ढोके तथा शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र के अनेक गणमान्य व्यक्तित्व उपस्थित थे।
पुलिस निरीक्षक सचिन हिरे ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए दो टूक शब्दों में कहा, शिक्षा की दौड में हम अनजाने में बच्चों को मैदान से दूर कर देते है और उनके हाथों में मोबाइल थमा देते है। मोबाइल स्क्रीन पर मिली जीत असली नहीं होती, लेकिन उससे पैदा होने वाला तनाव बिल्कुल असली होता है। बच्चों को मैदान में खेलने भेजना ही उनके भविष्य के लिए सबसे सुरक्षित और समझदारी भरा निवेश है। उन्होंने मध्यमवर्गीय और सामान्य परिवारों के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण, अनुशासित और किफायती शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए मंडल की विशेष प्रशंसा भी की।
उद्घाटन समारोह में बोलते हुए उपविभागीय पुलिस अधिकारी डॉं. विशाल नेहुल ने कहा, खेल विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को निखारते है। टीमवर्क, अनुशासन, आत्मविश्वास, खेल भावना और हार को स्वीकार करने की क्षमता ये सभी गुण केवल मैदान पर ही सीखे जा सकते है। ऐसे ही मैदानों से भविष्य के अधिकारी, नेता और जागरूक नागरिक तैयार होते है। उन्होंने मंडल द्वारा खड़ी की गई शैक्षणिक व्यवस्था को ‘शिक्षा की पंढरी’ बताते हुए अध्यक्ष संतोष जंगम और संचालक मंडल की दिल से सराहना की।
क्रीड़ा महोत्सव की प्रस्तावना प्राचार्य के. एम. गोरे ने रखी, जबकि अतिथियों का परिचय डॉं. गौरव तिवारी और अमित विचारे ने कराया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन डॉं. जयंत माने ने किया।
मोबाइल की बढ़ती लत पर करारा प्रहार करते हुए खेल के महत्व को रेखांकित करने वाला यह क्रीड़ा महोत्सव विद्यार्थियों के साथ-साथ अभिभावकों के लिए भी दिशा-निर्देशक साबित हुआ, ऐसा मत उपस्थित जनों ने व्यक्त किया।
