* 12 एकड़ में फैला जलगांव जिले का भव्य कब्रिस्तान वृक्षारोपण से बना ‘ग्रीन कब्रिस्तान’
* बीएमसी के उद्यान अधीक्षक जितेंद्रसिंह परदेशी का महत्वपूर्ण योगदान
नगरदेवला / फिरोज पिंजारी :- 'कब्रिस्तान’ शब्द सुनते ही आमतौर पर लोगों के मन में सुनसान जगह, तपती धूप, सन्नाटा और भय का वातावरण उभर आता है। चारों ओर छोटी-बड़ी कब्रें, मुरझाए फूल, धूल की परतें, कांटेदार झाड़ियाँ और पेड़ों की छाया में पसरी उदासी… ऐसी जगहें इंसान को क्षणभर के लिए अंतर्मुख कर देती है और जीवन के अंतिम सत्य का एहसास कराती है। लेकिन नगरदेवला गांव का मुस्लिम कब्रिस्तान इस पारंपरिक धारणा को तोड़ते हुए आज ‘हरियाली के सान्निध्य में शांति का उद्यान’ बनकर उभर रहा है।
* जलगांव जिले के सबसे बडे कब्रिस्तानों में शामिल :- नगरदेवला का यह कब्रिस्तान लगभग 12 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। गांव से थोडा दूर होने के बावजूद अब इसके आसपास बस्ती विकसित हो चुकी है। कब्रिस्तान के पास नाले, भव्य प्रवेशद्वार और लगभग 2 से 3 हजार नमाजियों के एक साथ नमाज अदा कर सकने की क्षमता वाला बडा ईदगाह है। लेकिन इस कब्रिस्तान की सबसे बडी पहचान यहां फैली हरियाली है। हजारों पेड़ों से घिरा यह परिसर आज एक ‘ग्रीन जोन’ के रूप में नजर आता है।
* हरियाली से सुकून का एहसास :- कब्रिस्तान में प्रवेश करते ही चारों ओर फैली घनी हरियाली, विभिन्न फलदार पेड, फूलों के पौधे और सुगंधित वनस्पतियां मन को शांति और ताजगी का अनुभव कराती है। सुबह-शाम फूलों की खुशबू, ठंडी हवा की झोंके और पक्षियों की चहचहाहट इस स्थान को एक अलग ही अनुभूति प्रदान करती है। जो जगह कभी वीरान लगती थी, वहां आज प्रकृति की हरियाली ने नई जान फूंक दी है।
* दानशूर हाथों का ‘ग्रीन अभियान’ :- इस कब्रिस्तान में वृक्षारोपण के लिए शासकीय योजनाओं के साथ-साथ कई दानशूर व्यक्तियों का योगदान रहा है। विशेष रूप से नगरदेवला के सुपुत्र तथा बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के उद्यान अधीक्षक (क्लास-1) जितेंद्रसिंह विठ्ठलसिंह परदेशी का योगदान उल्लेखनीय है। पिछले वर्ष उन्होंने नारियल, आम, चीकू समेत विभिन्न फलदार और फूलों के 100 से अधिक पौधे कब्रिस्तान को भेंट किए थे। इन पौधों की स्थिति देखने के लिए 25 जनवरी 2026 को वे कब्रिस्तान पहुंचे थे, जहां मुस्लिम पंच कमेटी की ओर से उनका भावपूर्ण सत्कार किया गया।
इसी पहल को आगे बढ़ाते हुए 10 फरवरी 2026 के बाद जितेंद्रसिंह परदेशी ने कब्रिस्तान के लिए करीब 450 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पौधे भेजे। रमजान महीने से पहले नगरदेवला की सामाजिक संस्था ‘अली ग्रुप 313’ के युवाओं ने श्रमदान कर इन पौधों का रोपण किया। इससे आने वाले समय में कब्रिस्तान की हरियाली और भी घनी होने वाली है।
* पर्यावरण संरक्षण की नई मिसाल :- कब्रिस्तान में वृक्षारोपण और उनकी देखभाल सिर्फ सौंदर्य बढाने तक सीमित न रहकर पर्यावरण संरक्षण का एक सशक्त संदेश दे रही है। ‘अंतिम विश्राम’ की जगह भी हरियाली से सुसज्जित हो सकती है, यह नगरदेवळा के कब्रिस्तान ने साबित कर दिखाया है। इससे भाविकों को मानसिक शांति मिलती है और आसपास के नागरिकों के लिए भी यह हरियाली जीवनदायी साबित हो रही है।
* समाज के लिए प्रेरणादायी उदाहरण :- मुस्लिम पंच कमेटी ने बीएमसी के उद्यान अधीक्षक जितेंद्रसिंह परदेशी का पुनः आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी कब्रिस्तान के सौंदर्यीकरण और हरित विकास के लिए ऐसा ही सहयोग मिलता रहेगा। नगरदेवला का यह कब्रिस्तान आज केवल ‘कब्रों की जगह’ न रहकर पर्यावरण-संवेदनशीलता, शांति और प्रकृति से जुड़े एक हरित उद्यान के रूप में पहचाना जा रहा है। यह पहल अन्य गांवों के लिए भी निश्चित ही प्रेरणादायी उदाहरण बनेगी।
