राष्ट्रीय राजमार्ग 543 पर मेंटेनेंस के नाम पर लीपा-पोती!

* गड्ढे जस के तस, ठेकेदार पर करोडों रुपये के घोटाले के गंभीर आरोप

बालाघाट / शैलेंद्र सिंह सोमवंशी :- बालाघाट से नैनपुर को जोडने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 543 पर चल रहे मेंटेनेंस कार्य को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। कागजों में सडक का नियमित रखरखाव दिखाया जा रहा है, लेकिन हकीकत में सडक की हालत बद से बदतर बनी हुई है। जगह-जगह गड्ढे जस के तस हैं और मेंटेनेंस कार्य केवल लीपा-पोती तक सीमित नजर आ रहा है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सडक के रखरखाव के नाम पर सरकारी धन का खुला दुरुपयोग किया जा रहा है, जबकि सडक की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हो रहा।


* मेंटेनेंस के नाम पर करोड़ों का दुरुपयोग ? :- ग्रामीणों और नियमित राहगीरों का कहना है कि हर साल मेंटेनेंस के लिए करोड़ों रुपये की राशि स्वीकृत की जाती है, लेकिन उसका असर सड़क पर कहीं दिखाई नहीं देता। लोगों का आरोप है कि ठेकेदार केवल औपचारिकता निभाकर शासन को भ्रमित कर रहा है और भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा रहा है।


स्थानीय लोगों के अनुसार, गड्ढों में केवल थोडी-सी मिट्टी या डामर डालकर समतल कर दिया जाता है, जो कुछ ही दिनों में फिर उखड़ जाता है। इससे साफ जाहिर होता है कि न तो गुणवत्तापूर्ण सामग्री का उपयोग हो रहा है, न ही निर्धारित मानकों और नियमों का पालन किया जा रहा है।


* यात्री और वाहन चालक सबसे ज्यादा परेशान :- खराब सडक का सबसे ज्यादा असर दोपहिया वाहन चालकों, छोटे वाहनों, स्कूली बसों और एंबुलेंस पर पड रहा है। बारिश के मौसम में यही गड्ढे गंभीर हादसों का कारण बन सकते है। वाहन चालकों का कहना है कि ईंधन की खपत बढ गई है, वाहनों के पार्ट्स जल्दी खराब हो रहे है, आए दिन फिसलने और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। 


* प्रशासन से कडी कार्रवाई की मांग :- स्थानीय नागरिकों और ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मेंटेनेंस कार्यों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाएं। सडक की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराई जाएं। ठेकेदार के बिल, भुगतान और साइट निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएं। दोषी पाएं जाने पर ठेकेदार के खिलाफ कडी कानूनी कार्रवाई की जाएं। 


* आंदोलन की चेतावनी :- ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सडक का स्थायी सुधार कार्य शुरू नहीं किया गया, तो वे सामूहिक रूप से सडक पर उतरकर आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी।


राष्ट्रीय राजमार्ग जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर इस तरह की लापरवाही अब सवालों के घेरे में है। जनता यह जानना चाहती है कि आखिर मेंटेनेंस के नाम पर खर्च हुआ पैसा गया कहां ?

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