तिनगड़ी ग्राम में करोड़ों की शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा ?

* ग्रामीणों का आरोप : पटवारी और तहसीलदार की लापरवाही से अतिक्रमण गहराया

बालाघाट / शैलेंद्र सिंह सोमवंशी :- बालाघाट जिले की लामता तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत सकरी के तिनगड़ी ग्राम में करोड़ों रुपये की सरकारी भूमि पर बडे पैमाने पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। ग्रामीणों के अनुसार, बाहरी व्यक्ति ने करीब 8 से 10 एकड़ शासकीय भूमि पर कब्जा कर लिया है और शासन को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस भूमि पर स्थित बडे झाड - झंखाड वाले क्षेत्र को जेसीबी मशीन से समतल कर खेती योग्य भूमि में बदल दिया गया है। यह अतिक्रमण कई वर्षों से जारी है, लेकिन राजस्व विभाग के अधिकारी अब तक मूकदर्शक बने हुए है।

* ग्रामीणों और सरपंच का बडा आरोप - राजस्व अमला बना रहा मूकदर्शक :- ग्राम पंचायत सकरी की सरपंच सोनेलाल मर्शकोंले और ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से आरोप लगाया कि वर्ष 2018 में भी इसी प्रकरण की शिकायत की गई थी, लेकिन राजस्व विभाग के अधिकारियों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।


ग्रामीणों का कहना है कि पटवारी और तहसीलदार दोनों ही स्तर पर निष्क्रियता के कारण अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हो गए है। परिणामस्वरूप अब सरकारी भूमि को पूरी तरह समतल कर खेती जैसी गतिविधियाँ शुरू कर दी गई हैं।

* धृतराष्ट्र जैसी कार्यशैली : ग्रामीणों की कडी टिप्पणी :- ग्रामीणों ने राजस्व विभाग की कार्यशैली पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि अधिकारियों की भूमिका धृतराष्ट्र जैसी है। सब कुछ देखने के बावजूद आंखें मूंदे बैठे है।


ग्रामीणों का आरोप है कि पटवारी ने मौके पर सही सर्वे नहीं किया और तहसील कार्यालय से कोई प्रभावी हस्तक्षेप नहीं हुआ।


* सरकारी भूमि पर खेती की तैयारी तक - ग्रामीणों में गहरी चिंता :- स्थानीय नागरिकों के अनुसार, अतिक्रमणकारियों ने सरकारी भूमि को पूरी तरह समतल कर खेती की तैयारियाँ तक शुरू कर दी है। भूमि की कीमत करोड़ों रुपये में आँकी जा रही है।


ग्रामीणों का कहना है कि यह भूमि सरकारी तालाब निर्माण हेतु प्रस्तावित थी, किंतु अतिक्रमण के चलते यह योजना भी अधर में लटक गई है।


* सरपंच की मांग : शीघ्र हटाया जाए अतिक्रमण :- ग्राम पंचायत सकरी के सरपंच सोनेलाल मर्शकोंले ने बताया कि, जिस भूमि पर अवैध कब्जा किया गया है, वह तालाब निर्माण हेतु प्रस्तावित है। इसका खसरा नक्शा हल्का पटवारी द्वारा 11 दिसंबर 2025 को लिया गया था। अतः प्रशासन से मांग की जाती है कि शीघ्र ही भूमि को अतिक्रमणमुक्त किया जाए।* 


* प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग :- ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि अतिक्रमण स्थल का तत्काल निरीक्षण कर रिकॉर्ड का मिलान किया जाए। अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई की जाए। पटवारी एवं तहसीलदार की भूमिका की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए। अतिक्रमणकारियों पर राजस्व एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाए।


ग्रामीणों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सामूहिक आंदोलन करने को बाध्य होंगे।


* तहसीलदार का जवाब : शीघ्र जांच व कार्रवाई होगी :- अतिक्रमण मामले पर जब लामता तहसीलदार के. एल. तेकाम से जानकारी ली गई, तो उन्होंने कहा कि, आपके द्वारा दी गई जानकारी से प्रकरण संज्ञान में आया है। शीघ्र ही हल्का पटवारी से स्थल निरीक्षण कराया जाएगा और अतिक्रमण व पेड़ों को नुकसान पहुंचाने के मामले में शासनात्मक कार्यवाही करते हुए भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराया जाएगा।


* जनता की मांग - निष्पक्ष जांच और कडी कार्रवाई जरूरी :- ग्रामीणों का कहना है कि अब यह मामला केवल अतिक्रमण का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और भ्रष्टाचार पर सवाल उठाने वाला मामला बन गया है। लोगों ने मांग की है कि शासन तत्काल उच्चस्तरीय जांच कराए और दोषियों पर उदाहरणीय कार्रवाई सुनिश्चित करे।


अब सवाल यह है कि क्या करोड़ों की सरकारी भूमि को बचाने के लिए प्रशासन जागेगा, या फिर फाइलों में दब जाएगी तिनगड़ी की यह कहानी ?

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