* सब्जी व फलों की बागवानी पर संकट, किसान चिंतित ; त्वरित आपूर्ति की मांग
कर्जत / नरेश जाधव :- रबी फसल के अंतिम चरण में रायगढ़ जिले के कर्जत तहसील सहित खालापुर क्षेत्र में यूरिया खाद की गंभीर कमी महसूस की जा रही है, जिससे किसानों में भारी चिंता और असंतोष का माहौल है। इस समय सब्जी की फसलें तथा आम, चीकू जैसे फलदार पौधों को पोषण की अत्यधिक आवश्यकता होती है। लेकिन जिले के कई खाद विक्रय केंद्रों पर यूरिया उपलब्ध न होने से किसानों को खाली हाथ लौटना पड रहा है। खाद की कमी के कारण फसलों की बढ़वार प्रभावित होने और उत्पादन घटने की आशंका जताई जा रही है।
रायगढ़ जिले के विभिन्न खाद बिक्री केंद्रों का निरीक्षण करने पर कई जगहों पर यूरिया का स्टॉक समाप्त पाया गया। कर्जत तहसील के कडाव, कशेले, नेरल तथा खालापुर तहसील के विभिन्न गांवों में किसान सुबह से शाम तक दुकानों के चक्कर काट रहे है।
किसानों का कहना है कि “हमने कई केंद्रों पर पूछताछ की, लेकिन कहीं भी यूरिया उपलब्ध नहीं है।” इससे खेती के समय पर खाद न मिलने के कारण फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका बढ गई है।
इस चरण में सब्जियों, फलदार बागानों और अन्य फसलों को नाइट्रोजनयुक्त खाद की आवश्यकता होती है। यूरिया की कमी से फसलों की बढ़वार रुकने, फलधारणा कम होने और अंततः उत्पादन घटने की संभावना है। पहले से ही मौसम में बदलाव और बढ़ती उत्पादन लागत से जूझ रहे किसानों पर खाद की कमी का यह एक और बडा संकट बनकर सामने आया है।
कर्जत तहसील किसान क्रांति संगठन के सलाहकार पंढरीनाथ विट्ठल दाभाडे ने प्रशासन पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि रायगढ़ जिले में खाद के कारखाने होने के बावजूद स्थानीय किसानों को समय पर और पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल रही है, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मांग की कि पहले रायगढ़ जिले के सभी तहसीओं के किसानों की जरूरत पूरी की जाएं, उसके बाद ही अन्य स्थानों पर खाद भेजी जाएं।
किसान संगठनों और ग्रामीणों ने कृषि विभाग व जिला प्रशासन से तत्काल यूरिया की आपूर्ति सुचारू करने की मांग की है। किसानों का कहना है की, तहसील स्तर पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराया जाएं, खाद विक्रय केंद्रों पर नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाएं, कृत्रिम कमी (आर्टिफिशियल शॉर्टेज) रोकने के लिए सख्त नियंत्रण किया जाएं।
रबी सीजन के निर्णायक दौर में यदि यूरिया की कमी बनी रही, तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड सकता है। उत्पादन में गिरावट, बाजार भाव पर असर और किसानों के कर्ज में बढ़ोतरी जैसी समस्याएं सामने आ सकती है। अब किसानों की उम्मीदें शासन के त्वरित और ठोस निर्णय पर टिकी हुई है।
