* पुलिस बंदोबस्त में हटाया गया अतिक्रमण कुछ ही महीनों में दोबारा खड़ा
* विनोद पवाली की आधी रात में अवैध टपरी ; ग्रामपंचायत व एसटी प्रशासन की भूमिका पर प्रश्नचिन्ह
* विद्यार्थियों से लेकर बुजुर्गों तक यात्रियों को परेशानी ; सख्त कार्रवाई की मांग
* कार्रवाई नहीं हुई तो फिर उग्र आंदोलन की चेतावनी
कर्जत / नरेश जाधव :- कडाव गांव में एसटी महामंडल के सरकारी बस स्टॉप की जमीन पर एक बार फिर अवैध टपरी खड़ी किए जाने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस बंदोबस्त में अतिक्रमण हटाए जाने के बावजूद कुछ ही महीनों में वही अतिक्रमण दोबारा खड़ा हो जाने से ग्रामपंचायत प्रशासन, एसटी महामंडल और समूचे प्रशासन की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल खडे हो गए है।
करीब 10 से 12 वर्ष पहले कडाव गांव के आधिकारिक एसटी बस स्टॉप को तोड़कर वहां अवैध दुकानों के गल्ले बना दिए गए थे। इसके चलते स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों, महिलाओं, बुजुर्गों और आम यात्रियों को धूप - बारिश में सड़क पर खड़े होकर बस का इंतजार करना पड़ता था। इस अतिक्रमण के कारण सार्वजनिक सुविधा प्रभावित हो रही थी।
सामाजिक कार्यकर्ता व पत्रकार प्रभाकर गंगावणे ने बस स्टॉप की जमीन से अतिक्रमण हटाकर दोबारा सरकारी बस स्टॉप बनाने के लिए लगातार प्रशासन से पत्राचार व आंदोलन किए। कोरोना काल में कुछ समय के लिए यह संघर्ष रुका था, लेकिन बाद में फिर से जोर पकड लिया। कर्जत प्रेस एसोसिएशन व कर्जत प्रेस क्लब ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया। 24 जुलाई 2025 को कडाव ग्रामपंचायत परिसर में पत्रकारों ने प्रतीकात्मक उपोषण कर प्रशासन का ध्यान आकृष्ट किया। इसके बाद 26 जुलाई 2025 को पुलिस बंदोबस्त में बस स्टॉप पर किया गया अवैध निर्माण हटाया गया था।
अतिक्रमण हटने के बाद एसटी महामंडल ने कडाव में सुसज्ज यात्री बस स्टॉप बनाने के लिए लगभग 21,13,078 रुपये की लागत का प्रस्ताव शासन को भेजा था। इससे ग्रामीणों में उम्मीद जगी थी कि जल्द ही सुरक्षित और सुविधाजनक बस स्टॉप मिलेगा। लेकिन जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव की आचार संहिता का फायदा उठाते हुए विनोद काशीनाथ पवाली ने आधी रात में उसी जगह पर फिर से अवैध टपरी खड़ी कर दी, ऐसा आरोप लगाया जा रहा है। पुलिस बंदोबस्त में हटाया गया अतिक्रमण फिर से खड़ा होना प्रशासन, न्याय व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सीधा अपमान माना जा रहा है।
इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता प्रभाकर गंगावणे ने अवैध टपरी को तत्काल हटाकर भारतीय न्याय संहिता के तहत सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। सार्वजनिक स्थान पर बार-बार अतिक्रमण करना कानून का उल्लंघन है और ऐसे मामलों में मिसाल कायम करने वाली कार्रवाई जरूरी है।
अब कडाव ग्रामपंचायत और एसटी महामंडल इस पर क्या ठोस कदम उठाते हैं, इस पर गांववासियों की नजरें टिकी हैं। बस स्टॉप की जमीन पर दोबारा अतिक्रमण होने से नागरिकों में रोष व्याप्त है। यदि प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो तीव्र आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी गई है।
सार्वजनिक सुविधाओं पर अतिक्रमण केवल कानूनी मुद्दा नहीं बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और अधिकारों से जुड़ा विषय है। प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि वह समय रहते ठोस कदम उठाकर बस स्टॉप को अतिक्रमण मुक्त करे और यात्रियों को राहत दे।
