मुंबई में ‘भस्मांचल’ हिंदी नाटक का प्रभावशाली मंचन

* कालिदास सभागार, मुलुंड में 14 दिसंबर 2025 को प्रस्तुति

* माता-पिता के प्रति संवेदनशीलता और सामाजिक संदेश ने दर्शकों को झकझोरा

मुंबई / संवाददाता :- मुंबई के मुलुंड स्थित कालिदास सभागार में 14 दिसंबर 2025 को सामाजिक सरोकारों पर आधारित हिंदी नाटक “भस्मांचल” का सशक्त और प्रभावशाली मंचन किया गया। नाटक का लेखन, निर्माण और निर्देशन मोहन नायर ने किया, जबकि मंच निर्देशन हर्षल राणे के जिम्मे रहा। प्रस्तुति ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ते हुए समाज के ज्वलंत मुद्दों पर गहरी सोच के लिए प्रेरित किया।

“भस्मांचल” का मुख्य विषय आज के दौर में माता-पिता की उपेक्षा और वृद्धाश्रम की वेदना को उजागर करता है। नाटक दर्शाता है कि कैसे माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य के लिए जीवनभर त्याग करते है। उत्तम शिक्षा, करियर और विवाह तक हर जिम्मेदारी निभाते है, लेकिन बुढापे में वही संतानें उन्हें घर-जायदाद से वंचित कर वृद्धाश्रम भेज देती है। वृद्धाश्रम में माता-पिता को झेलनी पडने वाली मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक यातनाओं को नाटक ने बेहद मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया।


नाटक का दूसरा भाग एक और गंभीर सामाजिक समस्या पर रोशनी डालता है, जहाँ दलाल तकनीकी शिक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभाशाली युवाओं को विदेशी कंपनियों के नाम पर फँसाते है। कहानी में एक छात्र का परिवार इस व्यवस्था का विरोध करता है, लेकिन दलाल उन्हें तबाह कर देता है। छात्र किसी तरह बच निकलता है और अपने मित्र के साथ मिलकर उस दलाल से बदला लेता है, जिसकी माँ भी वृद्धाश्रम में रहती है।


कहानी का भावनात्मक शिखर तब आता है जब छात्र दलाल से प्राप्त धन को वृद्धाश्रम जाकर माता-पिता के खातों में जमा कराता है और पासबुक सौंपते हुए कहता है। अब तुम्हारा परिवार आएगा और तुम्हें अपने साथ घर ले जाएगा। यह दृश्य दर्शकों को भीतर तक झकझोर देता है।


“भस्मांचल” यह सशक्त संदेश देता है कि माता-पिता सोने-चाँदी या आभूषणों से भी अधिक अनमोल और भगवान से भी अधिक पूजनीय है। उनकी सेवा और सम्मान से ही जीवन में सुख, सौभाग्य और आशीर्वाद प्राप्त होते है।


कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता श्रीकांत नायर, जयंत नायर और शर्ली पिल्लई विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि युवा सेना के संस्थापक राजूल संजय पाटिल मुख्य अतिथि रहे। इस नाटक का मीडिया पार्टनर ‘स्वदेश न्यूज’ रहा।


कुल मिलाकर, “भस्मांचल” ने मनोरंजन के साथ-साथ समाज को आत्ममंथन के लिए मजबूर किया और दर्शकों में माता-पिता के प्रति संवेदनशीलता व जिम्मेदारी की भावना को और मजबूत किया।

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