₹1.17 करोड की ठगी के मामले में टीवी अभिनेत्री गिरफ्तार

* 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ फेम मसूमी मेवावाला सातवीं बार धोखाधड़ी के आरोप में घिरीं

मुंबई / विशेष संवाददाता :- बांगुर नगर पुलिस ने सीनियर सिटीजन से ₹1.17 करोड की कथित ठगी के मामले में टेलीविजन अभिनेत्री से फैशन उद्यमी बनी मसूमी मेवावाला, उनके पिता राजेश मेवावाला और भाई भार्गव मेवावाला को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार, तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की संबंधित धाराओं तथा महाराष्ट्र जमाकर्ता हित संरक्षण अधिनियम (MPID Act) के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 18 दिसंबर 2025 तक पुलिस/न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

* कैसे हुई कथित ठगी :- पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शिकायतकर्ता, जो कि 60 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक है। एक लाभदायक खाद्य व्यवसाय विशेष रूप से समोसा और वड़ा पाव सप्लाई के कारोबार में निवेश का लालच दिया गया था।

पीड़ित ने कथित तौर पर अधिक मुनाफे का आश्वासन मिलने के बाद ₹1.17 करोड़ निवेश किए। हालांकि, पैसा मिलने के बाद आरोपी कथित रूप से संपर्क से गायब हो गए और मोबाइल फोन बंद कर दिए। कई प्रयासों के बावजूद राशि वापस न मिलने पर पीड़ित ने पुलिस का रुख किया, जिसके बाद एफआईआर दर्ज की गई।

* आरोपियों की पृष्ठभूमि :- मसूमी मेवावाला को ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’, ‘कुटुंब’ और ‘कुसुम’ जैसे लोकप्रिय टीवी धारावाहिकों से पहचान मिली थी। बाद में उन्होंने फैशन उद्योग में कदम रखते हुए ‘पिंक पीकॉक काउचर’ नाम से अपना ब्रांड शुरू किया। उनके पिता राजेश मेवावाला फाउंटेन ड्राय फ्रूट के मालिक है, जो बॉम्बे हाई कोर्ट के सामने स्थित है।

* कई एफआईआर और पुराने मामले :- पुलिस सूत्रों के अनुसार, मेवावाला परिवार के खिलाफ मुंबई और अन्य क्षेत्रों में कम से कम सात एफआईआर दर्ज है। इनमें धोखाधड़ी, जालसाजी, विश्वासघात और MPID एक्ट के तहत गंभीर आरोप शामिल है। विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि मसूमी मेवावाला पर यह सातवां ऐसा मामला बताया जा रहा है।

बायकुला पुलिस स्टेशन में दर्ज CR No. 598/2021 में आरोपियों ने अदालत के समक्ष ₹50 लाख जमा करने का भरोसा दिलाया था, जिसके आधार पर उन्हें जमानत मिली थी। हालांकि, शिकायतकर्ताओं के अनुसार, वादा की गई राशि पूरी तरह वापस नहीं की गई। इसके अलावा, आरोपियों के खिलाफ कई चेक बाउंस मामलों के लंबित होने की भी जानकारी सामने आई है।

* सीनियर सिटीजन्स को बनाया गया निशाना :- जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपी विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, खासकर महिलाओंको भावनात्मक रूप से प्रभावित कर और तय मुनाफे का लालच देकर निवेश के लिए फंसाते थे। विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज शिकायतें एक समान modus operandi (तरीके) की ओर इशारा करती है।

* पुलिस कार्रवाई की सराहना :- पीड़ितों ने मुंबई पुलिस की हालिया कार्रवाई का स्वागत किया है और वर्षों से जारी कथित धोखाधड़ी मामलों में सख्त कदम उठाने के लिए आभार जताया है। विशेष रूप से डीसीपी संदीप जाधव (यूनिट-11), सीनियर पुलिस निरीक्षक रविंद्र आव्हाड, बांगुर नगर पुलिस स्टेशन, जांच अधिकारी प्रमोद बांकर की सराहना की गई। 

पुलिस के अनुसार, तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचना के आधार पर आरोपियों को लोअर परेल स्थित उनके निवास से गिरफ्तार किया गया।

मुंबई पुलिस ने बताया कि धनराशि के लेन-देन (मनी ट्रेल) की जांच जारी है और अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों ने संकेत दिए है कि दस्तावेजी साक्ष्य और बयान मिलने के बाद अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ी जा सकती है।


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