रायगढ / संवाददाता :- रायगढ ज़िले के रोहा तहसील के तळाघर महादेववाड़ी में बच्चों की कला ने इस बार पूरे इलाके का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बच्चों ने अपनी कल्पना, मेहनत और देशभक्ति के साथ रायगढ़ किले की एक शानदार प्रतिकृति तैयार की है। लेकिन इस मासूम रचनात्मकता के बगल में लगे एक बैनर ने अब इस पूरे माहौल को सियासी रंग दे दिया है।
* बच्चों की कला, लोगों की भीड़ और सियासी तकरार :- 'शिव समर्थ नगर’ इलाके में बच्चों ने रायगढ़ किले की आकर्षक झांकी बनाई है। किले के तोरण, बुर्ज, मुख्य दरवाजा और आसपास के पहाड़ी इलाकों को देखकर ऐसा लगता है मानो असली रायगढ किला आपके सामने हो। इस झांकी को देखने के लिए इलाके के लोग बडी संख्या में उमड रहे है। लेकिन इसी झांकी के बगल में लगा एक बैनर - जिस पर लिखा है, “रायगढ़ किले और ज़िले की रखवाली करने वाली” - अब चर्चा का कारण बन गया है। इस बैनर में महाराष्ट्र सरकार की मंत्री आदिती तटकरे का चित्र भी है।
* बैनर को लेकर मतभेद :- बैनर लगते ही सोशल मीडिया और स्थानीय राजनीति में हलचल मच गई। कुछ लोगों का कहना है कि, यह बैनर मंत्री आदिती तटकरे के जनसेवा कार्यों का प्रतीक है, जिन्होंने रायगढ़ के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वहीं, दूसरी तरफ कुछ लोग इस पर नाराज़गी जताते हुए कह रहे है कि बच्चों की रचनात्मकता में राजनीति को मिलाना गलत है। ये कला देशभक्ति की भावना से प्रेरित है, इसे सियासी संदेश देने का मंच नहीं बनाना चाहिए।
* बच्चों की मेहनत - राजनीति से परे एक प्रेरणा :- स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बच्चों ने बिना किसी मदद के, स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हुए यह झांकी तैयार की। इस झांकी में शिवाजी महाराज की मूर्ति, दरबार, और किले की संरचना इतनी सजीव बनाई गई है कि हर देखने वाला प्रभावित हो रहा है। हमने केवल रायगढ़ किला बनाया, ताकि लोग शिवाजी महाराज का इतिहास याद रखें, एक बाल कलाकार ने मासूमियत से कहा।
* सोशल मीडिया पर रायगढ़ का ‘पोस्टर वार’ :- सोशल मीडिया पर इस बैनर को लेकर #RaigadKilla और #AditiTatkare जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे है। कुछ यूज़र्स ने इसे “राजनीति का दिखावा” कहा, तो कुछ ने “स्थानीय नेतृत्व के प्रति सम्मान” बताते हुए समर्थन किया।
* राजनीतिक जानकारों की राय :- राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रायगढ़ शिवसेना (उद्धव) और राष्ट्रवादी (शरद पवार) दोनों के लिए भावनात्मक प्रतीक रहा है। ऐसे में किसी भी राजनीतिक चेहरे का रायगढ़ किले के साथ जुड़ना “राजकीय संदेश” माना ही जाएगा।
* जब कला बन गई राजनीति का मंच :- रायगढ़ किला, जो मराठा इतिहास और छत्रपति शिवाजी महाराज की शौर्यगाथा का प्रतीक है, वह अब बच्चों की रचनात्मकता के माध्यम से जीवंत हुआ है। पर उसी कला के बगल में लगे बैनर ने यह सवाल खड़ा कर दिया है, क्या अब मासूम कल्पनाशीलता भी राजनीति से अछूती नहीं रही ?
