* नेपाल, अमेरिका और भारत के विभिन्न राज्यों से पहुंचे 45 साहित्यकारों को सम्मानित किया गया
* विशिष्ट अतिथि रहे हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, पंचकूला के निदेशक डॉं. धर्मदेव ‘विद्यार्थी’
जींद / संवाददाता :- हिंदी साहित्य की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए “हिंदी साहित्य प्रेरक संस्था (पंजी.) जींद” ने अपने 65 वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में “साहित्यकार सम्मान एवं पुस्तक लोकार्पण समारोह 2025” का आयोजन 26 अक्टूबर, 2025 (रविवार) को हिंदी भवन, जुलानी रोड, जींद में किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था की अध्यक्षा श्रीमती शकुन्तला काजल ‘शकुन’ ने की, जबकि समारोह में हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, पंचकूला के निदेशक डॉ. धर्मदेव ‘विद्यार्थी’ ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
* साहित्य साधकों का हुआ सम्मान :- कार्यक्रम में नेपाल, अमेरिका और भारत के विभिन्न राज्यों से आए कुल 45 साहित्यकारों को ₹2100 की नकद राशि, प्रशस्ति पत्र, चादर और उत्तरीय देकर सम्मानित किया गया। इन साहित्यकारों ने हिंदी साहित्य, कविता, कहानी, लेखन और पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दिया है।
* कार्यक्रम की रूपरेखा और मंच संचालन :- समारोह का मंच संचालन संस्था के महासचिव डॉं. बलराज ‘स्नेही’ ने अपने सधे हुए शब्दों में किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान वातावरण में साहित्य, काव्य और संस्कृति की सुगंध घुली रही।
* सम्मानित साहित्यकारों की उपस्थिति में गूँजा हिंदी भवन :- कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख साहित्यकारों में रामफल खटकड़, ओमप्रकाश चौहान, देवदत्त देव, सुशीला जांगड़ा, कमलेश गोयत, डॉं. जगदीप राही, जयदेव अत्री, आजाद जुलानी, कुमारी दीपिका, मंजू मानव, रामकुमार भारतीय कविराज, धर्मवीर आर्य, राजकुमार वर्मा, विकास यशकीर्ति, मनोज वंश, जगदीश चंद्र पांचाल, रानी सोनिया पांचाल, राजकुमार नैन, दिनेश शर्मा, रमेश धारीवाल, जितेंद्र अहलावत, बिशंबर तिवारी, दीपिका बिंदल, सुरेंद्र शर्मा सहित कई कविवृंदों की उपस्थिति रही।
* कविताओं और रचनाओं ने बाँधा समां :- कार्यक्रम में सम्मानित साहित्यकारों ने अपनी-अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कर सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया। हिंदी कविता, गीत, ग़ज़ल, दोहे और व्यंग्य के रंगों से सभागार गूँज उठा। विशेष आकर्षण रहा वरिष्ठ साहित्यकार श्री हरिश्चंद्र ‘बंधु’ का हरियाणवी बोली में काव्यपाठ उनकी रचना ने सभी उपस्थित जनों का मन मोह लिया और सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा।
* संस्था की निरंतरता और समर्पण का प्रतीक समारोह :- संस्था की अध्यक्षा श्रीमती शकुन्तला काजल ‘शकुन’ ने अपने संबोधन में कहा की, हिंदी साहित्य प्रेरक संस्था का यह 65वां वर्ष इस बात का प्रमाण है कि साहित्य की ज्योति आज भी उज्ज्वल है। हमारा उद्देश्य है - हिंदी भाषा, साहित्य और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुँचाना। मुख्य अतिथि डॉं. धर्मदेव ‘विद्यार्थी’ ने कहा की, हिंदी केवल भाषा नहीं, यह भारतीय आत्मा की अभिव्यक्ति है। जो संस्थाएँ हिंदी को समर्पित हैं, वे राष्ट्र निर्माण के मूल में है।
समारोह के समापन पर सभी अतिथियों और सम्मानित रचनाकारों को संस्था की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रगान के साथ यह भव्य आयोजन संपन्न हुआ।
