* 50 वर्षों से झोपडी में जीवन बिताने को मजबूर
* वृद्ध पेंशन से लेकर प्रधानमंत्री आवास योजना तक किसी भी लाभ से वंचित ; पंचायत व प्रशासन की अनदेखी पर ग्रामीणों में रोष
लामटा - चरेगांव / शैलेंद्र सिंह सोमवंशी :- लामटा तहसील के चरेगांव में रहने वाली 65 वर्षीय आदिवासी बुजुर्ग महिला ताराबाई उइके पिछले कई दशकों से सरकारी योजनाओं के लाभ से पूरी तरह वंचित हैं। लगभग 50 वर्षों से मजदूरी कर झोपडी में जीवनयापन कर रही ताराबाई को आज तक न तो विधवा पेंशन, न वृद्धावस्था पेंशन, और न ही प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है।
ग्रामीणों के अनुसार, ताराबाई लकवा (पैरालाइसिस) से पीडित है और अब चल-फिर तक नहीं सकतीं। खाना भी अपने हाथों से नहीं खा पातीं। उनका एकमात्र सहारा उनका बेटा रोज मजदूरी पर चला जाता है, जिसके कारण दिनभर ताराबाई खाने-पीने के लिए आवाज लगाती रहती है।
झोपडी में रहने के कारण तेज ठंड में कांपने, गर्मी में तपने और बारिश में भीगने की नौबत आ चुकी है। ग्रामीणों ने बताया कि अगर उनका पक्का आवास बन जाए, तो उन्हें राहत मिल सकती है, लेकिन पंचायत और प्रशासन की लापरवाही के कारण अब तक उनका जीवन नरकीय स्थिति में है।
* ग्रामीणों का प्रशासन से सवाल :- ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत के अधिकारियोंने वर्षों तक ताराबाई की स्थिति की अनदेखी की। उन्हें किसी सरकारी जनकल्याण योजना का लाभ न मिलना गंभीर लापरवाही का उदाहरण है।
* सरपंच का स्पष्टीकरण :- ग्राम पंचायत चरेगांव की सरपंच श्रीमती मीना बिसेन ने कहा की, वर्ष 2011 की सर्वे सूची में ताराबाई का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना में नहीं था। अब हमने उनका नाम जोड दिया है। जैसे ही नाम स्वीकृत सूची में आएगा, उन्हें तुरंत PM आवास योजना का लाभ दिया जाएगा। यह मेरी पहली प्राथमिकता रहेगी।
* मानवता को झकझोर देने वाली तस्वीर :- तारा बाई की कहानी सरकारी तंत्र की विफलता की वास्तविक तस्वीर उजागर करती है। दशकों की मेहनत के बाद भी जब एक बुजुर्ग महिला छत, भोजन व पेंशन जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हो। यह समाज की संवेदनशीलता और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों पर सवाल खडे करता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से ताराबाई को तत्काल सहायता, पेंशन मंजूरी और आवास स्वीकृति की मांग की है।
